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सेली  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
1.ऊन, सूत, रेशम या बालों की बनी एक मोटी डोरी जिसे योगी लोग गले में डालते हैं या सिर पर लपेटते हैं।
  • उदा.--1..सेली सीगी मेखळां, कांनि मुदरका घालि। हरीया जोगी जुगति विन, पच न सघै पालि।--अनुभववांणी
  • उदा.--2..कांनां बिच कुंडळ गळै बिच सेली, अंग भभूत रमाई रे। तुम देख्यां बिन कळ न पड़त है, ग्रह अंगणौ न सुहाई रे।--मीरां
2.स्त्रियों के सिर का एक आभूषण।
3.पगड़ी पर बांधने का एक आभूषण।
4.छोटा भाला, बरछी।
5.देखो 'सैर' (रू.भे.)
रू.भे.
सेल्ही।


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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