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सैर, सै'र
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
सं.स्त्री.
अ.
1.मनोरंजन के लिये की जाने वाली यात्रा, पर्यटन, तफरीह, सैर-सपाटा, घुमाई, भ्रमण।
उदा.--
साचैली दुनियां नै छोड वै सपनां अर मंसोबा री दुनियां मैं अस्टपौ'र
सैर
करता।--फुलवाड़ी
2.मौज, मस्ती, बहार, मनोविनोद।
उदा.--
खावण पीवण खैर,
सैर
करण चीजां सरब। हा हा तौ बिन हैर, जैर जिसौ जग है 'जसा'।--ऊ.का.
3.शिकार, मृगया।
रू.भे.
सेल, सैल, सैहर, सैहल।
4.देखो 'सहर' (रू.भे.)
उदा.--
1..
सै'र
री जाई गांव मैं आई अर मरी जद तांई राजी-ताजी रै'यी।--दसदोख
उदा.--
2..तळाव मांनसागर मा'मींदर मैं नैं पैर पक्की कराई तिण मैं पांणी ठैरै नहीं। और मा'मींदर
सै'र
बसायौ।--मारवाड़ री ख्यात
उदा.--
3..नहर सुधार रु नीर री, दाटी
सै'र
दुमार। मैरवांन मुरधर महिप, हैर गया म्है हार।--ऊ.का.
नोट:
पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।
राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं इतिहास
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