सं.पु.
सं.
1.यज्ञ की अग्नि में किसी देवता के निमित्त दी जाने वाली आहुति, बलि, चढ़ावा।
1.अब, इस समय, अभी।
- उदा.--1..जगपत रांण तणां जाळाहळ, जगत कथै जस जुवौ जुवौ। हैवर दणियर अधर हालतौ, हव सवर आधार हुवौ।--महारांणा राजसिंह रौ गीत
- उदा.--2..म बीह रे मूरख मूंछ मोडी, तूं बोलतु रावै नि कूडी। मइं ओलखी तउं हव अंगु साति, भाजउं जिसिइं कौरव सैन्य वाति।--सालिसूरि