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हिवा, हिवि, हिवें, हिवे, हिवैं, हिवै  
शब्दभेद/रूपभेद
व्युत्पत्ति
शब्दार्थ एवं प्रयोग
देखो 'हिव' (रू.भे.)
  • उदा.--1..पडिया पाइक न ऊसासीइ, हिवा हाथियां आरसासायइं, उंधा मउड पडइं, रेवंत रडवडइं, पडिया पंचायणनी परि हाकरइं...।--व.स.
  • उदा.--2..हिवि युगलियानां सुख साभलउ।--व.स.
  • उदा.--3..मोसा तौ बोल्या मुनैं, जइं मैं राख्यौ मांन। हिवें परणु तरुणी पदमणी, गालुं तुज्झ गुमांन।--प.च.चौ.
  • उदा.--4..हा हा करूं हिवै कासूं रे। माहरौ हिवड़ौ फटै मां सूं।--जयवांणी
  • उदा.--5..इहि विचि की संधि सु वयसंधि कहावै। जैसैं सुपिणौ। न सोवै छै न जागै छै। आगै पल पल चढतौ होसी। पिणि हिवै बैसंधि कौ इसौ प्रथम ग्यांन ताकी इसी परिछै।--वेलि.टी.
  • उदा.--6..हिवै जगदेवजी हवेली भाड़ै लेनै पाछा घोड़ां री ठौड़ आवै तौ चावड़ी घौड़ा दीसै नहीं नै रथ रा खोज दोसै।--जगदेव पंवार री बात
  • उदा.--7..भुजा बलै आलिम सुं एम, बोलै बादल गोरौ जेम। दिली सुं चढि आयौ सहि हिवैं, भिड़तौ भागै मति जाय।--प.च.चौ.


नोट: पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी सबदकोश मे आपका स्वागत है। सागर-मंथन जैसे इस विशाल कार्य मे कंप्युटर द्वारा ऑटोमैशन के फलस्वरूप आई गलतियों को सुधारने के क्रम मे आपका अमूल्य सहयोग होगा कि यदि आपको कोई शब्द विशेष नहीं मिले अथवा उनके अर्थ गलत मिलें या अनैक अर्थ आपस मे जुड़े हुए मिलें तो कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा सूचित करें। हार्दिक आभार।






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