सं.पु.
सं.हेमिन्
1.स्वर्ण, सोना, कंचन। (अ.मा., ह.नां.मा.)
- उदा.--1..किहां ऐरावण किहां अजा? किहां पीतल किहां हेम। अवर सहू अै अंधीउ, माधव जोतां तेम।--मा.कां.प्र.
- उदा.--2..गौ-कोटि-दांन ग्रहणै तु कासी, मकरै प्रयागै निज कल्पवासी। सुमेरु तुल्यं दै हेम दांनं, नहिं तुल्य नहिं तुल्य गोविंद नांम।--ह.र.
- उदा.--3..साह तांम समसेर, जड़त जवहरां जमंधर। मुलक वधारै समपि, हेम तौड़ा गज हैंमर।--सू.प्र.
2.वह वस्त्र जिस पर सोने का कार्य किया हुआ हो।
- उदा.--1..कनक काया गट कूंकूं लोल, कटीण पयोहर हेम कचौळ।--बी.दे.
- उदा.--2..सुचि कीजै स्नांन संपाड़ा, सहु पहिरै नवि नवि साड़ा। हीर चीर पांटंबर हेम, पहिरौ सहु भूखण प्रेम।--ध.व.ग्रं.
3.हेमंत ऋतु।
- उदा.--1..हेम सिसर रित मेड़तै, रहियौ कमंधा राव। संझ विहांणै ऊगणै, दिन दिन दूणौ चाव।--रा.रू.
- उदा.--2..सरद हेम नैं सिसर रित, रिति वसंत ग्रीखम्म। वरखां दांन बखांणि तूं, ए खट रित औपम्म।--रा.सा.सं.
- उदा.--3..रवि बैठौ कळसि थियौ पालट रितु, ठरैजु डहकियौ हेम ठंठ। ऊडण पंख समारि रहै अलि, कंठ समारि रहै कळकंठ।--वेलि.
9.बादामी रंग का घोड़ा। (शा.हो.) वि.--
1.शीतल, ठण्डा।
- उदा.--1..प्रीतम रौ मुक पेखतां, हिवड़ौ होवै हेम। लूआं पण रोकै मिळण, भलौ निभावै नेम।--लू
- उदा.--2..साग साल मळियागरी, वळि नाळेर विदांम। सोपारी खिरणी सरस, हेम हवा तिहि ठांम।--गजउद्धार
2.श्वेत, सफेद। * (डिं.को.)
4.देखो 'हिम' (रू.भे.)
- उदा.--1..उदधि सुजळ ऊझळै, हेम प्रघळै जळ हल्लै। दइत लाग नर देव, दसै द्रगपाळ दहल्लै।--सू.प्र.
- उदा.--2..हुवइ घटि नदी हेम हेमाळै, विमळ स्रंग लागा वाधण। जोवनागमि कटि क्रस थायै जिम, थायै थूळ नितंब थण।--वेलि.
- उदा.--3..मागुं तुझनइं मागसिर, जउ मुझ आंणि प्रेमि। ह्रदय कमलि रांमा रही, त्यांह म पाडिसि हेम।--मा.कां.प्र.
- उदा.--4..असारांण राजेस कमठांण कीधा अकळ, कोड़ जुग लगा जस कळिया। पाळ जोय हेम रा गरब टळिया पहळ, टाळ जोय समंद रा गरब टळिया।--जोगीदास कवियौ
- उदा.--5..अंब विवर तन, सीत सुतौ सब तीरथ न्हावै। कासी छाड देह, हेम बसि हाड गमावै।--ह.पु.वां.
- उदा.--6..मैं तौ दासी राज री, दुख दै कीनी नेस। अब तौ गळणा हेम मैं, आह घर री रेस।--स्री हरिरांमजी महाराज